रवींद्र के. राउत
रवींद्र के. राउत
सहायक प्रोफेसरपरिचय
डॉ. रविंद्र ने 2012 में फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे (जो पुणे विश्वविद्यालय से संबद्ध है) से रसायन विज्ञान में अपनी M.Sc. की डिग्री प्राप्त की। अपनी मास्टर की पढ़ाई के बाद, उन्होंने Mylan Pharmaceuticals, हैदराबाद में और उसके बाद National Chemical Laboratory, पुणे में मूल्यवान औद्योगिक अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद, उन्होंने Indian Institute of Science Education and Research (IISER) पुणे में प्रो. मौमिता मजूमदार के मार्गदर्शन में डॉक्टरेट अनुसंधान किया, जिसमें उनका मुख्य ध्यान 'मेन ग्रुप केमिस्ट्री' (main group chemistry) पर था। 2020 में, वे जापान के Hokkaido University स्थित Institute for Chemical Research Design and Discovery (ICReDD) में प्रो. बेंजामिन लिस्ट (रसायन विज्ञान में 2021 का नोबेल पुरस्कार विजेता) के समूह में एक पोस्टडॉक्टोरल फेलो के रूप में शामिल हुए। ICReDD में उनके योगदान के परिणामस्वरूप, 2024 में उन्हें 'विशेष रूप से नियुक्त सहायक प्रोफेसर' (specially appointed assistant professor) के पद पर पदोन्नति मिली। डॉ. रविंद्र 2025 में भारत लौट आए और Sai Life Sciences में एक अनुसंधान वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने व्यावहारिक रासायनिक अनुसंधान में अपनी विशेषज्ञता को और अधिक सुदृढ़ किया। मार्च 2026 से, वे IIT जोधपुर के रसायन विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनके वर्तमान अनुसंधान की रुचियाँ 'मेन ग्रुप तत्वों' (main group elements) के उत्प्रेरक अनुप्रयोगों की खोज करने में निहित हैं, जो मौलिक रसायन विज्ञान को व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जोड़ता है।
अनुसंधान
हमारा वर्तमान अनुसंधान रासायनिक विज्ञान में सतत नवाचार की खोज से प्रेरित है, जिसमें उत्प्रेरक अनुप्रयोगों के लिए 'मेन ग्रुप असममित संकुलों' (main group asymmetric complexes) के डिजाइन और विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। हमारा उद्देश्य पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले 'p-ब्लॉक तत्वों' की अब तक अप्रयुक्त क्षमता का उपयोग करके ऐसे नवीन उत्प्रेरक प्रणालियों को डिजाइन करना है, जो उच्च क्रियाशीलता, दक्षता और चयनात्मकता प्रदान करें। यह दृष्टिकोण प्रायोगिक रसायन विज्ञान को कम्प्यूटेशनल अंतर्दृष्टि के साथ एकीकृत करता है, ताकि नई क्रियाशीलता के पैटर्न और 'स्टीरियोकंट्रोल' रणनीतियों का पता लगाया जा सके। हमारे दृष्टिकोण का एक मुख्य आधार 'हाई-थ्रूपुट प्रयोग' (high-throughput experimentation) भी है, जो उत्प्रेरकों और अभिक्रिया की स्थितियों की त्वरित जांच (screening) को सक्षम बनाकर खोज की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है। नवीन डिजाइन और डेटा-संचालित प्रयोगों का यह एकीकरण हमें नई क्रियाशीलता के पैटर्न को उजागर करने, 'सब्सट्रेट' के दायरे का विस्तार करने, और भविष्य के वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करने में सक्षम बनाता है, ताकि वे रसायन विज्ञान को ऐसे समाधानों की ओर ले जा सकें जो बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हों। अनुसंधान के मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं -
- निम्न-संयोजकता वाले 'मेन ग्रुप संकुलों' का डिजाइन और विकास
- 'p-ब्लॉक तत्वों' द्वारा असममित उत्प्रेरण (Asymmetric catalysis)
- हाई-थ्रूपुट प्रयोग (High Throughput Experimentation)
- 'तनावपूर्ण वलयों' (Strained rings) का लुईस अम्ल द्वारा कार्यात्मकरण