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डॉ. प्रकाश चंद्र द्वारा अनुसंधान सेमिनार, 18 मई 2026 को सुबह 11:00 बजे।

व्याख्यान का शीर्षक: मार्शल-ओल्किन द्विचरी सामान्यीकृत जीवनकाल परिवार से प्राप्त वाम-छंटित और दक्षिण-सेंसरित प्रतिस्पर्धी जोखिम डेटा का विश्लेषण

दिनांक, समय और स्थान: 18 मई 2026 को सुबह 11:00 बजे, गणित विभाग के सेमिनार कक्ष में।

सारांश: यह व्याख्यान एक ऐसे वाम-छंटित (left-truncated) और दक्षिण-सेंसरित (right-censored) प्रतिस्पर्धी जोखिम मॉडल के लिए सांख्यिकीय अनुमान (statistical inference) पर चर्चा करता है, जिसमें विफलता के कारण आंशिक रूप से देखे गए और एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। इसमें यह माना गया है कि अव्यक्त विफलता समय (latent failure times) मार्शल-ओल्किन द्विचरी सामान्यीकृत जीवनकाल वितरण ढांचे का अनुसरण करते हैं। मॉडल के अज्ञात मापदंडों का अनुमान लगाने के लिए फ्रीक्वेंटिस्ट (frequentist) और बायेसियन (Bayesian) दोनों दृष्टिकोण विकसित किए गए हैं। अधिकतम संभाव्यता अनुमानक (Maximum likelihood estimators)—उनके अस्तित्व और अद्वितीयता गुणों सहित—प्राप्त किए गए हैं, और देखे गए फिशर सूचना मैट्रिक्स का उपयोग करके अनुमानित विश्वास अंतराल (confidence intervals) निर्मित किए गए हैं। बायेसियन अनुमान, वर्ग त्रुटि (squared error) और LINEX हानि फलनों (loss functions) के तहत गामा-डिरिचलेट पूर्व (Gamma–Dirichlet prior) का उपयोग करके किया जाता है; साथ ही, मापदंडों पर क्रम प्रतिबंधों (order restrictions) के तहत अनुमान पर भी विचार किया गया है। प्रस्तावित विधियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन व्यापक सिमुलेशन अध्ययनों के माध्यम से किया गया है, और इस कार्यप्रणाली को दो वास्तविक जीवन के डेटासेट का उपयोग करके स्पष्ट किया गया है।

वक्ता के बारे में: डॉ. प्रकाश चंद्र BIT, मेसरा के गणित विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने IIT पटना (2024) से सांख्यिकी में अपना Ph.D. प्राप्त किया, जहाँ उनका शोध सांख्यिकीय अनुमान पर केंद्रित था—विशेष रूप से सेंसरित और छंटित डेटा के तहत प्रतिस्पर्धी जोखिम मॉडलों के क्षेत्र में। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सांख्यिकी और कंप्यूटिंग में M.Sc. तथा पटना विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में B.Sc. (Hons.) की उपाधि प्राप्त की है।

डॉ. चंद्र की शोध रुचियों में सांख्यिकीय अनुमान, विश्वसनीयता विश्लेषण (reliability analysis), इष्टतम जीवन परीक्षण योजनाएँ और मशीन लर्निंग शामिल हैं। अपनी वर्तमान भूमिका से पहले, उन्होंने SRM विश्वविद्यालय AP में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य किया और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता में सांख्यिकीय प्रशिक्षु (Statistical Trainee) के रूप में काम किया।

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